Agriculture: किसान इस खेती से बन जाएंगे मालामाल
Agriculture News- किसान अगर पारंपरिक गेहूं की खेती की जगह वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करें तो कम लागत में भी ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत के बीच ऐसी कई फसलें हैं जो कम खर्च में बेहतर पैदावार देती हैं और बाजार में ऊंचे दामों पर बिकती हैं।।। आइए नीचे खबर में विस्तार से जान लेते है इस फसल के बारे में-
HBN News TV – (Agriculture News)। धान की कटाई के बाद, किसान गेहूं के बजाय तिलहनी फसल सरसों की खेती (Mustard cultivation) कर सकते हैं। लगातार बदलते मौसम, सिंचाई की कमी और गेहूं की बढ़ती लागत को देखते हुए, सरसों एक कम लागत वाला, अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प है। यह फसल न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि देश की तिलहन मांग के अनुरूप सोना उगलती साबित हो रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ। प्रमोद कुमार के अनुसार, सरसों की अच्छी फसल के लिए हल्की दोमट से मध्यम काली मिट्टी उत्तम है, जिसमें PH 6–7।5 हो और जल निकासी बेहतर हो। यह रबी की फसल है और इसे हल्की सर्दी पसंद है। यह बिना ज्यादा सिंचाई के 110 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। इसीलिए, कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए भी यह फसल उत्पादन की दृष्टि से बेहद अच्छी मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि पूसा बोल्ड, वरुणा, रोहिणी, आशीर्वाद, और जीएम-3 जैसी (sarson farming) उन्नत प्रजातियां स्थानीय बीज की तुलना में अधिक उत्पादन और मुनाफा देती हैं। बीज उपचार बहुत लाभकारी है। 3 ग्राम थायरम या कैप्टान प्रति किलो बीज का उपयोग रोग रोकता है और अंकुरण बेहतर करता है। साथ ही, माहू/दीमक से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग भी करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दो से तीन जुताई के बाद खेत को भुरभुरा बनाकर समतल किया जाता है। 45 सेमी कतार दूरी और 5-7 सेमी पौधे (agriculture news) की दूरी आदर्श मानी जाती है। समय से बुवाई अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक उत्पादन को 20–25% तक बढ़ा देती है। जिससे उन्हें अधिक मुनाफा हो सकता है।
उनके मुताबिक नाइट्रोजन 60–80 किलो, फास्फोरस 40 किलो और गंधक 20–25 किलो प्रति हेक्टेयर देना जरूरी होता है। सरसो को सामान्यतः 2–3 सिंचाई चाहिए होती है। पहली फूल आने पर, दूसरी दाना बनने पर। ड्रिप सिंचाई लगाने पर लागत घटती है और उपज बढ़ती है।
सरसों की फसल में कीट व रोग नियंत्रण-
सरसों की फसल (Sarso khite) को माहू, सफेद मक्खी और एफिड जैसे कीटों से बड़ा नुकसान होता है। शुरुआती अवस्था में इन्हें नीम तेल के प्राकृतिक स्प्रे से नियंत्रित किया जा सकता है।
सफेद जंग और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसे रोगों से बचाव के लिए, कार्बेन्डाजिम या मैंकोजेब फफूंदनाशक का छिड़काव करना प्रभावी होता है। उचित समय पर नियंत्रण करना फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सीड-कम-फर्टिलाइज़र ड्रिल, मल्टीक्रॉप पावर थ्रेशर और मिनी हार्वेस्टर जैसी मशीनें श्रम और समय की बचत करते हुए उत्पादन बढ़ाती हैं। सरकार इन मशीनों पर 40-50% सब्सिडी भी देती है, जिससे छोटे किसानों को भी लाभ मिलता है।
सरसों की खेती (Sarso khite) किसानों के लिए गेहूं से अधिक मुनाफे का सौदा है। एक हेक्टेयर में इसकी लागत लगभग 12,000 से 15,000 रुपये आती है, जबकि उत्पादन 12 से 18 क्विंटल तक होता है। बाजार में 5,500 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री होने पर किसान 40,000 से 70,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा लेते हैं।
First published on: November 18, 2025 03:21 PM