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Supreme Court Decision : किरायदार को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने मकान मालिक के हक में सुनाया फैसला

Supreme Court Decision : मकान मालिक और किरायेदार के बीच वाद-विवाद के मामले आए दिन सुनने को मिलते हैं। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मकान मालिक के हक में फैसला दिया है। आईये नीचे खबर में जानत हैं पूरा मामला -

HBN News TV – (Supreme Court News)। दिल्ली के एक पुराने किरायेदारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिससे देशभर के मकान मालिकों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किराए पर रहने वाला व्यक्ति कभी भी संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता, यदि वह वैध किरायानामा (valid tenancy) के तहत रह रहा हो। कोर्ट की ओर से आए इस फैसले को विस्तार से जानने के लिए इस खबर को पूरा पढ़ लें-

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ज्योति शर्मा बनाम विष्णु गोयल मामले में यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए कहा कि किरायेदार जिसने किरायानामा साइन किया, समय पर किराया दिया और मकान मालिक के मालिकाना हक (landlord’s ownership rights) को स्वीकार किया, वह बाद में उस संपत्ति पर विवाद नहीं उठा सकता है।

विवाद की पूरी कहानी –

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बतातें चलें कि यह विवाद साल 1953 से चल रहा था। दिल्ली की एक दुकान रामजी दास ने किराए पर दी थी, और बाद में उनके वारिसों को किराया मिलता रहा। 1999 में बनी वसीयत और 1953 के रिलींक्विशमेंट डीड (Relinquishment Deed) के आधार पर संपत्ति का स्वामित्व उनकी पुत्रवधू ज्योति शर्मा को मिला। उन्होंने पारिवारिक मिठाई व्यवसाय के विस्तार के लिए दुकान खाली कराने का दावा किया, लेकिन किरायेदारों ने विरोध किया और कहा कि यह संपत्ति रामजी दास के चाचा की थी और वसीयत फर्जी है।

Supreme Court ने दी स्पष्ट टिप्पणी –

निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले (Delhi Highcourt Decision) को सुप्रीम कोर्ट ने गलत और बिना ठोस सबूतों वाला बताया। बेंच ने स्पष्ट किया, “जब कोई किरायेदार वैध किरायानामा साइन करता है और नियमित किराया देता है, तो वह बाद में मकान मालिक की मालिकाना स्थिति (Proprietary status of the landlord) पर सवाल नहीं उठा सकता।” कोर्ट ने यह भी कहा कि किरायेदारी का मतलब केवल मालिक की अनुमति से लिया गया कब्जा है, न कि मालिक के खिलाफ किया गया कब्जा।

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इतने समय में खाली करना होगा मकान –

कोर्ट ने लंबे समय से किरायेदार रह रहे परिवार को 6 महीने का समय दिया है ताकि वे बकाया किराया चुकाकर संपत्ति खाली कर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वसीयत को 2018 में प्रोबेट मिल चुका है, इसलिए उस पर संदेह करने का कोई आधार नहीं है। यह फैसला मकान मालिकों के हक (rights of landlords) में बड़ा कानूनी संकेत माना जा रहा है।

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First published on: December 01, 2025 01:15 PM

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