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Dhan ki Kimat : धान की पैदावार में गिरावट के बाद कीमतों में भी बड़ी गिरावट, इतनी रह गई कीमत

Dhan ki Kimat : धान की पैदावार में कमी ने किसानों की दिक्कतें और बढ़ा दी हैं। उत्पादन घटने के बावजूद बासमती धान की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। दरअसल, भारी लागत (huge cost) में खेती करने वाले किसान निराश हैं। पिछले साल जहां कीमतें अच्छी थीं, वहीं इस साल बाजार में धान की कीमत घटकर (paddy price decreased) सिर्फ इतने रुपये प्रति क्विंटल रह गई है, लागत के मुकाबले यह कीमत किसानों के लिए भारी नुकसानदेह साबित हो रही है-

HBN News TV – इस साल अच्छी बारिश होने के चलते धान की फसल तो ठीक रही, लेकिन सैनिक कीट लगने से पैदावार उत्पादन में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। कोटर गांव के किसान लल्लू प्रसाद त्रिपाठी, बब्बू तिवारी, चंद्रोदया, अशोक कुमार, विष्णु तिवारी और लोहरा के अशर्फी लाल का कहना है कि बासमती धान के दाम गिरने (Basmati rice prices fall) और पैदावार कम होने से वे काफी परेशान हैं।

 

बासमती धान की खेती (Basmati rice cultivation) करने वाले किसानों को इस साल न तो फसल का उचित मूल्य मिल रहा है और न ही उत्पादन उम्मीद के अनुसार हुआ है। किसानों का कहना है कि अधिक बारिश और गंगा कावेरी, सोना चूर व सोनम जैसी किस्मों पर सैनिक कीट लगने से पैदावार (Yields affected by armyworm) में लगभग 20 से 25 प्रतिशत की गिरावट आई है।

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किसानों के अनुसार, जहां एक बीघा में सामान्यतः 16 से 27 क्विंटल तक उत्पादन होता है, वहीं इस बार मात्र 8 से 10 क्विंटल ही पैदावार हुई है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष बासमती धान का दाम (basmati rice price) 4700 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि इस साल कीमत घटकर सिर्फ 3,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है। लागत के मुकाबले यह कीमत किसानों के लिए भारी नुकसानदेह साबित हो रही है। क्षेत्रीय किसानों (regional farmers) का कहना है कि फसल अच्छी थी मगर कटाई के पहले हुई बारिश से बहुत नुकसान हो गया। खेत में तैयार फसल पूरी तरह से गिर गई थी।

 

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इसका असर पैदावार पर पड़ा है। कोटर, लोहरा, पिपरहटा, कौहट, आदि गांवों के किसानों की सैकड़ो बीघा धान की फसल जमींदोज हो गयी थी। धान की पैदावार घटने (Decreased rice production) से सभी किसानों में निराशा हैं। इस साल किसानों के लिए बेहद अहम मानी जाने वाली धान की फसल पर मौसम का प्रतिकूल असर पड़ा है, जिसके चलते उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण इस बार प्रति बीघा उपज में लगभग 7-8 क्विंटल की कमी दर्ज की गई है।

 

भारी लागत में खेती करने वाले किसान निराश हैं। उनका कहना है कि अधिक बारिश के कारण धान की फसल (paddy crop) पूरी तरह से पक नहीं पाई, जिससे दाने छोटे और कमजोर हो गए। कई जगहों में जलभराव की वजह (cause of waterlogging) से पूरी तरह से फसल बर्बाद हो गई। फसल जब पकने की स्थिति में थी, तब अचानक बदलते मौसम ने किसानों को झटका दे दिया।

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First published on: December 04, 2025 01:10 PM

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