Sona Chandi Bhav : सोना-चांदी में गिरावट के 5 कारण आए सामने, विशेषज्ञों ने दी पूर्ण जानकारी
Sona Chandi Bhav : सोना और चांदी के दामों में आई गिरावट कई बड़े वैश्विक संकेतों का नतीजा रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक मजबूत होते डॉलर (strong US dollar impact), फेड की दिसंबर रेट-कट उम्मीदों में कमी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों की सुस्ती जैसी वजहों से कीमती धातुओं पर दबाव देखा गया... ऐसे में चलिए आइए नीचे खबर में जान लेते है कि विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में यह कमजोरी कब तक जारी रह सकती है-
HBN News TV (Gold silver price) सोना और चांदी के दाम गुरुवार (20 नवंबर) को वैश्विक बाजारों की सतर्क चाल के बीच दबे रहे। हालांकि, भारत में शादी के पीक सीजन के चलते घरेलू मांग अब भी मजबूत बनी हुई है। देश में 24 कैरेट सोना ₹12,469 प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹11,430 प्रति ग्राम पर बिक रहा है।
वहीं चांदी ₹165 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1.65 लाख प्रति किलो के भाव पर ट्रेड हो रही है। MCX पर भी दोपहर 2.20 बजे तक गोल्ड और सिल्वर 0.50% से अधिक की कमजोरी में कारोबार कर रहे थे।
वैश्विक बाजारों में दबाव का कारण
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्पॉट गोल्ड 0.4% गिरकर 4,064 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी 0.5% की कमजोरी दर्ज की गई। चांदी का दाम भी 1% से अधिक टूटकर कारोबार कर रहा है। कीमतों में यह गिरावट मजबूत होते डॉलर और दिसंबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा रेट कट की उम्मीदों के कमज़ोर पड़ने से जुड़ी हुई है।
OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग का कहना है कि पिछले दो हफ्तों में रेट कट की उम्मीदें काफी कम हो गई हैं। उनके मुताबिक, सोना शॉर्ट टर्म में 4,100 डॉलर से नीचे रह सकता है और कीमतें 4,000-3,980 डॉलर की ओर जा सकती हैं।
गोल्ड प्राइस गिरावट के 5 मुख्य कारण
- अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे अन्य देशों के लिए सोना खरीदना और महंगा पड़ रहा है।
- दिसंबर में फेड (December Fed meeting) की रेट-कट की उम्मीदें 50% से घटकर करीब 33% रह गई हैं, जिसके चलते गोल्ड की सेफ-हेवन डिमांड भी कम हुई।
- अमेरिका की नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट में देरी, बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और गोल्ड कमजोर हुआ।
- जापान के कैरी-ट्रेड अनवाइंडिंग (Carry-Trade Unwinding) की चिंता, जिससे ग्लोबल मार्केट वोलैटाइल हुए और सोने पर दबाव आया।
- Nvidia जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों के रिजल्ट अच्छे आए हैं। इससे गोल्ड के बदले share market की ओर रुझान बढ़ा है।
मजबूत डॉलर से गोल्ड पर दबाव
दिसंबर में रेट कट की संभावना पहले करीब 50% थी, जो अब घटकर लगभग 33% रह गई है। मजबूत डॉलर और फेड की हालिया मीटिंग मिनट्स से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक (central bank) फिलहाल पॉलिसी (policy) में ढील देने को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है।
Motilal Oswal के मानव मोदी के अनुसार, फेडरल रिजर्व में राय बंटी हुई थी, जिसे उन्होंने ‘डिवाइडेड फेड’ बताया। मुख्य चिंता थी कि जल्द ढील देने से महंगाई नियंत्रण (inflation control) की प्रगति रुक सकती है। इसके अलावा, अक्टूबर के अमेरिकी रोजगार डेटा का रद्द होना और जापान के कैरी-ट्रेड अनवाइंडिंग की आशंकाओं ने भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया।
जब निवेशक सस्ती मुद्रा (जैसे जापानी येन) में पैसा उधार लेकर महंगी मुद्रा वाले देशों में निवेश करते हैं, उसे कैरी ट्रेड कहते हैं। लेकिन जब बाजार में डर, वोलैटिलिटी (Volatility) या नुकसान की आशंका बढ़ती है, तो वे जल्दी से यह निवेश बेचकर पैसा वापस चुकाते हैं। इस बेचने की हड़बड़ी को कैरी-ट्रेड अनवाइंडिंग कहा जाता है। और इससे ग्लोबल मार्केट (Global Market) पर तुरंत दबाव पड़ता है।
बाजारों में और अधिक सतर्कता
अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट पर अब बाजार की नजर है, जिससे आगे की नीति का संकेत मिलेगा। यह रिपोर्ट देरी से आ रही है, इसलिए बाजार और ज्यादा सतर्क दिख रहा है।
शादी के सीजन से मजबूत मांग
वैश्विक कमजोरी (global market slowdown) के बावजूद भारत में खरीदारी का रुख मजबूत बना हुआ है। IBJA की वाइस प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज के अनुसार, 24 कैरेट सोने के दाम में हल्की बढ़त देखने को मिली है, जिसका मुख्य कारण शादी सीजन की तेज खरीद और निवेशकों की निरंतर दिलचस्पी है। चांदी में भी ज्वेलरी और निवेश दोनों (gold silver market trends) ओर से स्थिर मांग बनी हुई है।
सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
मेहता इक्विटीज के राहुल कलंत्री के अनुसार, सोने को 4,035-4,000 डॉलर प्रति औंस पर मजबूत सपोर्ट है। वहीं, 4,115-4,140 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस (resistance) देखने को मिल रहा है।
First published on: November 23, 2025 02:41 PM